कही सुनी

 आज पुराने मित्र है मेरे मुकुल जी उन्होंने कुछ तस्वीर साँझा की मुझे, हमारे उत्तराखंड के काल की तो यकायक अनगिनत यादें ताज़ा हो गईं। मेरी दोस्ती मुकुल जी से बड़ी जमी है शायद ही किसी और व्यक्ति से मेरी इस तरह की जमी हो क्योंकि हम दोनों ही समाज मे व्यथित स्थितियों को लेकर चिंतित रहे है और उनके बदलाव में लगे रहे है एक लंबे समय से। 2013 में उत्तराखंड में भयंकर तबाही के बाद में seeds की ओर से उत्तराखंड में पुनः निर्माण के कार्य के लिए गया था। मैंने बहुत से ऐसे मंजर देखे जिन्होंने मुझे अंदर तक हिला दिया था और शिवालिक के मेरे प्रवास ने मुझे आध्यात्मिक दृष्टि दे दी। मैं बहुत ऊपर पहाड़ो पर रहा लोगों की कठिन जीवन शैली से परिचय मिला और मेरा वजूद कितना सीमित है अस्तित्व में उसके दर्शन हुए । अनगिनत लोककथा, जाग्रत पुरुष देहधारी और देहत्यागे हुए भी, से मेरी मुलाकात हुई। जीवन के लक्ष्य को जाना मैंने और महाशिव के समीप रहने का सौभाग्य मिला।

बहुत सुंदर हैं पहाड़ लेकिन बहुत जटिल भी है जीवन शैली । हर छोटी वस्तु की भी बड़ी जंग है लेकिन जीवन जैसे उत्सव है वहाँ ।

बड़े सारे अनुभव है मेरे उत्तराखंड के प्रवास से क्योंकि मेरे ऑरोविले के प्रवास के तुरंत बाद ही मैं उत्तराखंड चला गया था और दोनों ही जगह के प्रवास ने मुझे आंतरिक तौर पर और बाहरी तौर पर स्थिरता दे गए । ऑरोविले में जो साधना शुरू हुई थी वो उत्तराखंड में भी जारी रही ।

कुछ अनुभव है मेरे दोनो ही जगह के जो सिर्फ मैंने बहुत ही निजी लोगो से साँझा किये है।

हाँ पहाड़ो पर रहो तो पहाड़ी होकर ही रहना, तभी पहाड़ की आत्मा तक पहुंच पाते है हम। जीवन के बाद भी यदि कोई जन्म है तो अब मेरा पहाड़ों पर ही होगा शायद कहीं भेड़ चराते हुए जीवन व्यतीत करूँगा ।

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