शरीर में चक्रों का महत्व और उनकी उपयोगिता

 हम सभी मनुष्यों के भौतिक शरीर के कुछ द्वार हैं, जिनके द्वारा हम अपने मन और अन्य क्रियात्मक क्षमताओं पर नियंत्रण और विजय प्राप्त कर सकते है या उन्हें अपनी सहूलियत के हिसाब से निर्देश दे सकतें हैं। आपने अक्सर बहुत बार शरीर में स्थित 7 चक्रों के विषय में कभी न कभी और कहीं न कहीं अवश्य सुना या पढ़ा होगा। योग में चरण दर चरण जब आप प्राणायाम में उतरते हैं तो आप अपने शरीर के इन्ही चक्रों की यात्रा में उतरते हैं। आज हम इन्ही चक्रों के विषय में कुछ चर्चा करेंगे और उनके महत्व को समझने का प्रयास करेगें । आप जैसे जैसे अपने चक्रों में उन्नति करते जायेंगे, वैसे वैसे आप पाएंगे कि आपके जीवनचर्या में रूपांतरण शुरू हो गया है। आप अक्सर ये महसूस करते होंगे की आप अपनी किसी खास आदत से परेशान है और उसे बदलना चाहते है किंतु कई कोशिशों के बाद भी आप उसे बदल नहीं पा रहें हैं, अक्सर आपको लगता होगा की क्या कारण हो सकता है की सब चेष्टा करने पर भी जीवन रूपांतरित नहीं हो रहा है जैसा होना चाहिए । अक्सर हम क्योंकि अपने शरीर को पूर्ण प्रकार से समझते नहीं है जिस कारण से हमारे प्रयत्न गलत दिशा में होते हैं।

“Designed by Freepik”
“Designed by Freepik”


ये चक्र जो सात जाने जाते है इस प्रकार होते है - मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्ध, आज्ञा तथा सहस्रर । अब इनकी उपस्थिति और इनको सक्रिय करने के लिए आप जरूर ही अपने योग शिक्षक तथा गुरु से अवश्य विचार विमर्श कीजिए । इस प्रकार आप यह भी जान पाएंगे की वर्तमान में आपका कौन सा चक्र सक्रिय है तथा आप योग में किस ओर जा रहे हैं । इस लेख में ज्यादा इस विषय पर जोर नही दे रहा की इन्हे कैसे सक्रिय करें, इस विषय पर अनेकों लेख आप पढ़ सकते है लेकिन मैं आपको इस बात के लिए ही प्रेरित करूंगा की अपने योग शिक्षक और गुरु से ही इस विषय को जाने और सीखें, वह आवश्यक है ।

इसी बात को आगे बढ़ाते हुए आप इस बात को समझिए की हमारी अधिकतर क्रियाओं के लिए यही चक्र सहायक होते हैं, चाहे हम इस बात को जानकर करें या अनजाने में। जैसे आप बहुत सी किताबों को जो जीवन,व्यापार और रिश्तों में उन्नति के विषय में बात करती है और जिस प्रकार से वो लेखक इन विषयों को बताते है या फिर आप किसी प्रेरक (मोटिवेशनल) वक्ता को सुनेंगे तो वो भी जाने अंजाने जिन बातों के लिए प्रेरित करते है वह शरीर के भिन्न चक्रों पर ही कार्य करती है। जैसे सकारात्मक सोच, मेहनत, समय का सदुपयोग इत्यादि लेकिन जब हम सही प्रकार से योग और प्राणायाम के द्वारा इस विषय की गहराई में उतरते है तो ये दो धार वाली तलवार का काम करती है अर्थात् आप इच्छित फल के लिए कार्यरत तो हो ही जाते है बल्कि उस से ज्यादा गहरी बात आपके साथ ये होती है की आप आध्यात्म में भी गहरे उतरने लगते है। बहुत ही सहजता से आप के व्यक्तित्व में तेज, तप और संकल्प की शक्ति का संचार होने लगता है और इस से भी ज्यादा उपयोगी एवम अच्छी बात ये होती है की आपके व्यक्तित्व के ये सकारात्मक बदलाव स्थाई होते है यानी जब आप अपने शरीर के चक्रों के अनुरूप कार्य करने लगते है तो वह सदा ही स्थाई होते है जबकि जब आप इस विषय के संबंध में ज्यादा नहीं जानते तो ये बदलाव बदलते रहते है/ स्थाई नहीं होते। आप खुद भी अनुभव करते होंगे की जब आप किसी को सुनते है जो बहुत प्रभावशाली ढंग से कोई भाषण दे रहा हो तो आप भी स्वयं में एक ऊर्जा महसूस करते होंगे किन्तु कुछ ही पल व दिनों में वो ऊर्जा चली जाती है । आपने सोचा है ऐसा क्यों होता है ? ऐसा इसी कारण से होता है की शरीर की शक्ति किन्ही चक्रों में संचालित नही जो उन कार्यों को करने के लिए उतरदायी हैं ।

इस योग दिवस के अवसर पर जरूर ही आप इस विषय पर चिंतन और मनन करें । ये शिक्षा और विज्ञान बहुत पुराने समय से हमारे पूर्वजों ने खोजा और अपनाया है और उसको उपयोग करके चरित्र निर्माण के शिखरों तक पहुंचें हैं । आज वो समय आ गया है की हम सब भारतीय वापस से योग के द्वारा स्वयं के शरीर को समझे जिस से हम निरोगी हों और इच्छित फलों के लिए पूर्ण मनोबल के साथ खुद को समर्पित कर दें । यह योग दिवस आपके जीवन में एक नई चेतना का विस्तार करें और आप स्वयं को और बेहतर समझ पाएं यही परमात्मा से मेरी कामना है। आप सभी के शुभ की कामना करते हुए मैं आपको पुनः एक बार दोहराते हुए विदा लूंगा की स्वयं के भीतर छुपे ब्रह्माण्ड को जगा दें।


टिप्पणियाँ