विवेकशील विद्यार्थी
कल मेरे एक स्टूडेंट ने मुझे फ़ोन किया, बहुत परेशान था और गुस्सा भी था लेकिन क्योंकि बोध की यात्रा शुरू हो चुकी है इसलिए अपने भीतर के बदलाव से हैरान भी था। बात बड़ी थी या छोटी कहना कठिन है। पिछले ही दिन उसके पिता और बड़े भाई एक मोटरसाइकिल खरीद लाये, गाँव के लोग है सीधे सादे इसलिए बहुत दिखावा अभी आया नही। इधर मेरे स्टूडेंट ने घर में कोहराम मच दिया क्योंकि वो स्प्लेंडर प्लस ले आये थे और हमारे प्रिय विद्यार्थी किसी स्पोर्ट बाइक का सपना देखे बैठे थे। अहंकार को चोट लगी गहरी की अब ये बाइक चलाऊंगा, दोस्त गर्लफ्रैंड पड़ोसी समाज सब क्या सोचेंगे । पिता और भाई ने नाक काट दी। बड़ी क्लेश के बाद भाई और पिता ने कहां की हम बदल लाएंगे बाइक लेकिन फिर उसने मुझे फ़ोन करके घटना बताई और कहा कि वो तो समझ रहा था कि बाहरी बस्तुएँ अब उसकी शांति पर फर्क नही डालती फिर ये क्या हुआ?
देखा
जाए तो स्प्लेंडर एक बेहतरीन बाइक है, कम पेट्रोल में ज्यादा चलती है। रख रखाव भी सस्ता
है और आरामदायक हल्की फुल्की मोटरसायकिल है लेकिन साधारण सी दिखती है। कोई भी ले सकता
है क्योंकि बजट में आती है। लेकिन वही बस बाहरी मेटल की बॉडी बदलते ही एक स्पोर्ट बाइक
उससे दुगनी कीमत ही हो जाती है। उस से बात करते हुए ख्याल में आया हम इंसानों के साथ
भी यही करते है, एक सुंदर स्त्री से हम आकर्षित हो जाते है जबकि केवल बाहरी बनावट अलग
होने पर। और बाहरी सौंदर्य के पैमानें भी समय के साथ बदल जाते है जैसे आजकल बहुत सी
महिलाएं अपने होंठ मोठे करवा लेती है क्योंकि बड़े होंठ सुंदरता का प्रतीक हैं हाल फिलहाल।
लेकिन चलो इंसान में फिर भी बोध और समझ का अंतर है, हम कह सकते हैं कि एक व्यक्ति हमें
पसंद है क्यूँकि वो समझदार है । लेकिन वस्तुएं हमें आकर्षित करती है, अब मेरे प्रिय
विद्यार्थी किसी रेस में भागीदारी नही करने जा लेकिन फिर भी स्पोर्ट बाइक चाहिए जबकि
वो खुद कह रहा है कि ये मन खेल रहा है लेकिन फिर भी आकर्षण हो रहा है।
लेकिन
वो समझदार है क्योंकि वो जाल में एकदम नही फंसा बल्कि रुक गया और सोच विचार करने लगा।
इस कारण से वासना और काम के विषय में वो समझ गया। उस से बात करके मुझे उस से और अधिक
प्रेम हो गया क्योंकि वो चाहता तो लड़ झगड़ कर दूसरी बाइक ले आता जो आने भी वाली थी,
लेकिन उसने पहले इस छोटे से विषय पर बात करना उचित समझा। बात और चिंतन करने से मन के
उल्झावों को वो समझ गया और एक कदम पीछे हट गया। बहुत ऊंची चेतना की बात है ये और मुझे
खुशी है कि मैं ऐसे व्यक्ति को मार्गदर्शन कर रहा हूँ। बहुत कम खुशकिस्मत लोगो को सही
में ही प्रतिभाशाली विद्यार्थी नसीब होते हैं ।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें