रैगिंग और आत्मज्ञान
जिस घटना पर मैं आज लिख रहा हूँ वो घटना जब हुई तब बहुत छोटी सी थी लेकिन बाद में मेरे लिए वो वरदान बन गयी । तो मैं बचपन से आर्किटेक्ट बनने का सपना देखता था औऱ 2007 तक मैं अस्सिटेंट आर्किटेक्ट बन चुका था। 2008 में मैं अपने ग्रेजुएशन B Arch में दाखिल हुआ । मेरा ग्रेजुएशन के लिए भोपाल जाना हुआ और मेरा कॉलेज NIT भोपाल के आर्किटेक्चर डिपार्टमेंट में था। NIT के प्रथम वर्ष में बहुत ही खतरनाक रैगिंग होती थी, ये बात मुझे अपने संस्थान में नही बल्कि भोपाल उतरते ही अपने मौसाजी से पता चल गयी थी। उनका कहना था की पूरे भोपाल में NIT की रैगिंग के चर्चे हैं । ये सुनकर मैं बहुत डर भी गया था उस समय ।
खैर
वो दिन आया जब मैं पहली बार अपने संस्थान में अपनी कक्षा में पहुँचा । मैंने कॉलेज
करीब 1 महीने के बाद शुरू किया था । पढ़ाई 1 महीने पहले से ही शुरू हो चुकी थी और मैं
वहां पहुंचने वाले अंतिम दल में से एक था । जब मैं वहाँ पहुँचा तो बड़ा ही अजीब सा माहौल
पाया। हर लड़का लगभग गंजा था। सभी सफेद शर्ट में थे और कोई भी बैग नहीं ला सकता था ।
शोषण क्या होता है ये मैंने वहां देखा था और क्योंकि कामवासना से लिप्त मन में स्त्री
का ही एकमात्र लक्ष्य होता है तो हर ब्रांच का सीनियर आर्किटेक्चर प्रथम वर्ष में आकर
रैगिंग जरूर लेता था और वो कितना महान व्यक्ति है इसका गुणगान जरूर करता था। सच कहूँ
तो आज जब मोदी जी के भाषण देखता हूं तो मुझे प्रथम वर्ष के कार्टून सीनियर याद आ जाते
हैं।
बहरहाल
क्योंकि मैं देर से पहुँचा था तो मैंने अपने साथी विद्यार्थियों से ये जानना चाहा की
क्या पढ़ाई अब तक हो चुकी है, तो मुझे एक ही उत्तर मिला, "पढ़ाई गयी तेल लेने ये
तूने कपड़े कैसे पहने और बाल क्यों नही कटवाए ? अरे तू फंडे में क्यों नही है?"
मेरा सर चकराया और मुझे जब उन लोगो ने फंडे बताये तो वो मुझे फंदे लगे। कौन मेरा टेक
बाप है और कौन मेरी टेक माँ , किस सीनियर को कैसे बोलना है वगेरह वगेरह । और अगर गलती
हुई तो वो बेहूदे सीनियर थप्पड़ मारेंगे। अब क्योंकि मैं आज ही आया था औऱ जल्द ही सीनियर
रैगिंग लेने आने वाले थे इसलिए एक सयाने आदमी ने मुझे एक मंत्र बताया जो मेरा गुरू
मन्त्र बन गया। वो बोला की देख तुझे अभी कुछ पता नही तो कोई भी सीनियर कुछ पूछे तो
बोलना "excuse me sir! Sorry sir ।" मैंने पूछ क्या बस यही बोलना है वो दूसरा
बंदा तो बड़े सारे कागज़ पर पता नही क्या क्या लिखवा गया है। उसने कहा कि हाँ ये कह सकते
है और हाँ! सीनियर की आंख में आंख डालकर नही देखना, तीसरे बटन को देखते रहो। खैर सीनियर
आते रहे और जिंदगी चलती रही। मुझे कभी किसी सीनियर ने रैगिंग के लिए नही पकड़ा क्योंकि
मैं बहुत ही सामान्य सा दिखने वाला एक आम लड़का था।
लेकिन
कहते हैं न की एक न एक दिन सबका घड़ा भरता है। मेरा भी भर गया था। एक दिन हम सभी लोग
एक पंक्ति में कंप्यूटर की क्लास के लिए जा रहे थे की वहाँ एक सीनियर आ धमका और मेरे
आगे खड़े लड़के को डाँटने लगा । उस लड़के ने उस सीनियर की नज़र जिस लड़की पर थी उस से दोस्ती
जो कर ली थी। तो वो सीनियर थोड़ा टेंशन में था। इस गहमा गहमी में उस सीनियर की नज़र मुझे
पर पड गयी ।
वो
बोला, "क्यों बे! सीनियर की आंखों में आँखें डालकर देखता है बहुत चर्बी चढ़ी है।
क्या नाम है बे तेरा?"
मैंने
उसे अपना नाम बताया । खैर उसे मेरा नाम समझ आया नही, जैसा आमतौर पर सबको ही नही आता
है पहली बार में ।
वो
बोला, "क्यों बे सीनियर की आंख में देखता है?"
मैं
बोला, " sir मैं तो अपना तीसरा बटन ही देख रहा हूं लेकिन आपकी हाइट कम है इसलिए
आपकी आंखें मेरे तीसरे बटन के लेवल पर है। इस वजह से आपको लग रहा है की मैं आपकी आंखों
में देख रहा हूँ।"
मेरे
ऐसा कहना था की वो आग बबूला हो गया और मुझे पकड़ कर बाहर ले गया। राहत की बात ये रही
की वो अकेला था 3-4 होते तो मैं पिट चुका होता अब तक।
वो
बोला, "क्यों बे साले! तेरे funde clear हैं क्या?"
मैं
आत्मविश्वास से बोला, "हाँ है।"
2
घड़ी वो अवाक रह गया और बोला ,"अबे सारे funde पता है तुझे?"
मैं
बोला, "हाँ सब पता है, बहुत ही आसान है।"
अब
तक वो फ्रस्ट्रेशन में आ गया था और बोला की आज तक मुझे नही पता सारे funde तुझे कैसे
पता। funde हैं ही इतने की कोई पता कर ही नही सकता। अच्छा चल बता मेरा नाम क्या है?"
मैं
बोला, "excuse me sir sorry sir."
वो
बोला, "निकल गयी हवा। चल अपने टेक बाप का नाम बता?"
मैंने
फिर बोला,"excuse me sir sorry sir."
अब
बस मैं पीटने ही वाला था क्योंकि वो जो सवाल पूछता मेरा जवाब एक ही था, Excuse me
sir! Sorry sir.
उसने
अपना सर पकड़ लिया और बोला की तू तो कह रहा था की तुझे सारे funde पता हैं।
मैंने
कहा ,"हाँ सर् पता हैं। जब भी कोई सीनियर कुछ पूछे और तुम्हे पता न हो तो उसको
बोलो excuse me sir sorry sir. और जब ये ही पता चल गया तो अब आगे और कुछ पता करने की
जरूरत ही क्या है।
"इसका
मतलब तुझे कुछ नही पता" वो झुंझला के बोला।
मैंने
कहा ,"पता तो है sir यही बोलना है सबको excuse me sir sorry sir।"
वो
बोला की अब तूने एक और बार बोला excuse me sir sorry sir तो तू अभी पिटेगा।
मैंने
बोला," excuse me sir, sorry sir"
उसने
मेरा कॉलर पकड़ लिया और बोला ," तू साले! तू लंच में अपनी क्लास में रहियो मैं
तुझे वही देखूंगा।"
वो
पैर पटकता हुआ चला गया और मेरा दिल बैठ चुका था क्योंकि मुझे पता था की अब लंच में
मेरी बैंड बजने वाली है। मैं अपना बोरिया बिस्तर लेकर कॉलेज से भागा और अपने कमरे पर
आ गया जिसके बाद 5-6 दिन में कॉलेज गया ही नहीं ।
मुझे
कभी अपने किसी सीनियर से कोई लगाव नही रहा क्योंकि मुझे वो लोग विक्षिप्त ही लगे, जो
दूसरों को सताने में मज़ा लेते थे।
खैर
कॉलेज खत्म होने के बाद आध्यात्मिक खोज में भी मुझे बहुत से फंडे मिले, कोई कहता था
ऐसे करो, कोई कहता था वैसे करो, ये क्रिया, वो ध्यान ,सम्यक समाधि, एकाग्रचित सुनना
। इन सब झंझटों में मुझे अपना कॉलेज याद आ गया और बस मैंने जैसे तब इसी बात को सूत्र
बना लिया था वैसे ही अब मैंने सब ज्ञान डिब्बे में डाल कर बस एक नया सूत्र बना लिया।
मेरे
सीनियर ने कुछ भी किया हो लेकिन अहंकार जब तड़पता है तो कैसा होता है ये मुझे दिखा दिया
था उस दिन। आज भी मैं अपनी अंदरूनी वृतियों पर यही फंडा लगाता हूँ।
ये
संसार पूरा भरा पड़ा है ऐसे सीनियर से औऱ जब कोई मुझसे कुछ पूछता है तो मैं कुछ भी कहता
हूँ हर वाक्य की आत्मा में यही है "excuse me sir! Sorry sir!!"
मेरे
लिए इसका इतना सा मतलब था, तब भी और अब भी कि तुम्हारी सांसारिक बेवकूफी से मुझे क्या
लेना देना।
दुनिया
तुम्हारी तुम जानो ।
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